मुख्य सामग्री पर जाएं
+91 98999 90006
Mahamrityunjaya Charitable Trust emblemBlessed to Serve, Committed to Care

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥

हम कौन हैं

ये हैं वे लोग जो इस ट्रस्ट को चलाते हैं, और वह कारण जो हर एक को यहाँ लाया।

यह ट्रस्ट क्यों है

मैंने महामृत्युंजय चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना एक ही हार्दिक इच्छा से की कि कोई कैंसर रोगी केवल इसलिए आशा न खोए क्योंकि इलाज उसकी पहुँच से बाहर है। यदि हम एक परिवार का बोझ हल्का कर सकें, एक रोगी को सांत्वना दे सकें और उन्हें यह याद दिला सकें कि वे अकेले नहीं हैं, तो हमारी यह यात्रा सार्थक होगी।
रितु कालियाअध्यक्ष एवं संस्थापक

मेरी कहानी और मेरा संकल्प

मैं अक्सर कहती हूँ कि पीड़ा जब श्रद्धा के साथ स्वीकार की जाए, तो वह उद्देश्य बन जाती है।

मेरी यात्रा कठिनाई से शुरू हुई — एक ऐसा बचपन जिस पर आर्थिक संघर्ष की छाया थी, और जिसने मुझे पढ़ाई के अपने सपने छोड़ने पर विवश किया। फिर भी हर चुनौती से मैंने सहनशीलता की मौन शक्ति और करुणा की सुंदरता सीखी।

इकलौती संतान होने के नाते मेरी दुनिया मेरे माता-पिता के इर्द-गिर्द ही घूमती थी — वही मेरी शक्ति थे, वही मेरा घर, वही मेरा सब कुछ। मैंने विवाह नहीं किया, क्योंकि मेरी एकमात्र इच्छा थी उनकी सेवा करना और उन्हें प्रसन्न रखना। पर जीवन की, जैसा कि अक्सर होता है, अपनी ही योजनाएँ थीं।

  1. 2008

    पिताजी को लकवे का दौरा

    मेरे पिता को लकवे का दौरा पड़ा — एक ऐसा क्षण जिसने हमारे छोटे से परिवार को जड़ से हिला दिया। घर में कमाने वाली मैं अकेली थी, और पूरी ज़िम्मेदारी मुझ पर आ पड़ी। मैंने देखा कि लोग कैसे मुँह मोड़ लेते हैं जब उन्हें डर होता है कि आप उनसे सहायता माँग सकते हैं। पर महादेव की कृपा से मुझे कभी हाथ नहीं फैलाना पड़ा। मैंने हर कठिनाई का सामना श्रद्धा और स्वाभिमान के साथ किया।

  2. मई 2011

    माँ को कैंसर (चौथी अवस्था)

    मेरी माँ को कैंसर का पता चला, और निदान के केवल पंद्रह दिनों के भीतर वे इस संसार से चली गईं। मेरे पास शोक करने का समय नहीं था; मुझे अपने पिता के लिए मज़बूत बने रहना था। वे सबसे अंधेरे दिन थे — पैसों का प्रबंध, उनका इलाज, और वह भावनात्मक पीड़ा जिसे शब्दों में कहा ही नहीं जा सकता। तब मैंने स्वयं जाना कि अपने संघर्ष में पूरी तरह अकेले होना क्या होता है।

  3. मई 2016

    मेरा अपना हृदयाघात

    इस तनाव और पीड़ा ने मुझ पर अपना असर छोड़ा। मुझे भारी हृदयाघात हुआ, मेरी धड़कन रुक गई, और कुछ मिनटों के लिए मुझे मृत घोषित कर दिया गया। पर महादेव ने मुझे दूसरा जीवन दिया। उस क्षण ने मेरा पूरा दृष्टिकोण बदल दिया — मैंने जाना कि जीवन स्वयं एक दैवीय उपहार है, और हर साँस अपने से बड़े किसी उद्देश्य के लिए लगनी चाहिए।

  4. फ़रवरी 2020

    पिताजी को कैंसर (चौथी अवस्था)

    जिस समय पूरी दुनिया कोविड-19 के भय से जूझ रही थी, उसी समय मेरे पिता को कैंसर का पता चला। पूरे एक वर्ष मैं उनकी कीमोथेरेपी के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाती रही, इस डर के साथ कि कहीं उन्हें संक्रमण न हो जाए — क्योंकि कुछ हो जाता तो मुझे उन्हें अंतिम बार देखने तक की अनुमति न मिलती। मैंने अनवरत प्रार्थना की, पर मेरी सेवा और उनके साहस के बावजूद, 2 फ़रवरी 2021 को वे मुझे छोड़ गए। उस दिन मैंने केवल अपने पिता को नहीं खोया — मैंने अपनी पूरी दुनिया खो दी।

माता-पिता दोनों के चले जाने के बाद मैं पूरी तरह अकेली रह गई — न परिवार, न भाई-बहन, न कोई अपना। उसके बाद का सन्नाटा असह्य था। पर उसी सन्नाटे में मुझे कुछ पवित्र मिला — दैवीय उद्देश्य की फुसफुसाहट।

मेरी पीड़ा ने मुझे एक दुर्लभ वरदान दिया था — दूसरों की पीड़ा को समझ पाने की क्षमता।

मैंने तय किया कि अपने शोक को भलाई में, अपने अकेलेपन को प्रेम में और अपने आँसुओं को दूसरों के लिए शक्ति में बदलूँगी। भगवान महादेव की भक्त होने के नाते मुझे उनकी दिव्य ऊर्जा में साहस और दिशा मिली — और इस प्रकार महामृत्युंजय चैरिटेबल ट्रस्ट का जन्म हुआ, एक सरल स्वप्न के साथ: जो चुपचाप पीड़ा सहते हैं, उन्हें सांत्वना और सम्मान देना।

जब भी कोई बच्चा मुस्कुराता है, कोई बुज़ुर्ग मुझे आशीर्वाद देता है, या किसी रोगी में आशा लौटती है, मुझे अपने माता-पिता की उपस्थिति अपने पास महसूस होती है। उनका आशीर्वाद हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करता है। यह कार्य उनके प्रेम को मेरी श्रद्धांजलि है — इसी के माध्यम से उनकी करुणा जीवित रहती है।

मेरा अपना परिवार भले न हो, पर आज मुझे एक परिवार मिल गया है — उन जीवनों में जिन्हें मैं छू पाती हूँ। मैं शायद पूरी दुनिया न बदल सकूँ, पर यदि मैं एक भी जीवन बदल सकी, तो वही मेरे लिए पूरी दुनिया होगी।

अब मेरी एकमात्र इच्छा यही है कि शेष जीवन गरीबों और ज़रूरतमंदों के बीच प्रेम, आशा और सम्मान बाँटते हुए बिताऊँ। क्योंकि दूसरों को उठाने में मुझे शांति मिली है, और उनकी सेवा में मुझे उद्देश्य।

और आज पीछे मुड़कर देखती हूँ तो समझ आता है — जीवन ने मुझे तोड़ा नहीं, जगाया है। महादेव की कृपा से मैंने अपनी पीड़ा को उद्देश्य में बदला, और अपने उद्देश्य को सेवा में।

ॐ नमः शिवाय

जिन्होंने सब कुछ खो दिया है, उनके लिए आशा करुणा के सबसे छोटे भाव में आती है।

Blessed to serve, committed to care.

ट्रस्ट के शुभारंभ की तिथि, 11 सितंबर, उनके पिता का जन्मदिन है।

सुनील सिंहसह-संस्थापक एवं प्रबंध ट्रस्टी

मैं इस कार्य से क्यों जुड़ा

ईशावास्यमिदं सर्वं… मा गृधः कस्यस्विद्धनम्

लोभ मत करो, धन आख़िर किसका है?
ईशोपनिषद्

यह शिक्षा मुझ तक तब पहुँच चुकी थी जब मैं इसे पढ़ भी नहीं सकता था। मैं यह समझते हुए बड़ा हुआ कि किसी व्यक्ति के पास अपनी और अपने परिवार की आवश्यकता से जो अधिक है, वह कभी उसका रखने के लिए था ही नहीं। वह एक धरोहर है, और वह उसे उनकी सेवा के लिए चुना हुआ ठहराती है जो हर दिन एक वक़्त के भोजन का भरोसा नहीं रख सकते, और उनकी भी जो ऐसी बीमारी से लड़ रहे हैं जिससे अकेले लड़ने का ख़र्च वे उठा नहीं सकते।

मैंने इसे उपदेश के रूप में नहीं, आचरण के रूप में देखा। मेरा जन्म एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के परिवार में हुआ। हमारे पास अतिरिक्त कुछ नहीं था, फिर भी मेरे माता-पिता ऐसे रहते थे मानो सदा रहा हो: हर महीने भोजन का वितरण, बुज़ुर्गों के हाथों में रखा गया चश्मा, उन बच्चों की स्कूल फ़ीस जो अन्यथा पढ़ने से रह जाते। उन्होंने बस “पर्याप्त” की रेखा अपने लिए अधिकांश लोगों से कहीं पास खींच रखी थी।

इसलिए जब रितु ने अपना संकल्प मेरे सामने रखा, तो सोचने-विचारने को कुछ था ही नहीं। अब समय आ गया है कि मेरे माता-पिता ने मुझे जो सिखाया, उसे मैं आरंभ करूँ।

राजारमन शंकर

वरिष्ठ सलाहकार

राजारमन शंकर महामृत्युंजय चैरिटेबल ट्रस्ट से वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़े हैं। वे तीन दशकों से अधिक का विशिष्ट नेतृत्व एवं कॉर्पोरेट अनुभव साथ लाए हैं। रणनीतिक दृष्टि, संचालन-कुशलता और सुदृढ़ संस्थागत साझेदारियाँ बनाने की क्षमता के लिए जाने जाने वाले शंकर जी नेतृत्व, अभिशासन, संसाधन प्रबंधन और विविध हितधारकों के साथ सहयोग का अमूल्य अनुभव रखते हैं।

आशा है कि उनके मार्गदर्शन से ट्रस्ट एक सुदृढ़, पारदर्शी और सतत नींव बना सकेगा, अभिशासन को मज़बूत करेगा, सार्थक साझेदारियाँ विकसित करेगा और अपने कार्यक्रमों का प्रभाव बढ़ा सकेगा।

डॉ. गोगी रमण मूर्ति

चिकित्सा सलाहकार

डॉ. गोगी रमण मूर्ति एक कुशल मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हैं और महामृत्युंजय चैरिटेबल ट्रस्ट के न्यास मंडल के चिकित्सा सलाहकार हैं। उन्हें चिकित्सा एवं ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में पंद्रह वर्ष का अनुभव है।

वे ट्रस्ट को नैदानिक परामर्श और मार्गदर्शन देते हैं, चिकित्सा मूल्यांकन की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने में सहायता करते हैं, और कैंसर रोगियों की करुणा, गरिमा और देखभाल के साथ सहायता करने के ट्रस्ट के संकल्प को बल देते हैं।

योग्यताएँ

  • एमबीबीएस, डॉ. एनटीआर हेल्थ साइंसेज़ विश्वविद्यालय, 2010
  • जनरल मेडिसिन में एम.डी., अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली, 2014
  • ऑन्कोलॉजी में डी.एम., अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली, 2018

न्यास मंडल

  • रितु कालिया

    अध्यक्ष एवं संस्थापक

    मीडिया, विनिर्माण, एफएमसीजी, चिकित्सा और आतिथ्य उद्योगों में तीन दशकों से अधिक समय तक नेतृत्व के दायित्व सँभाले हैं

    chairperson@mmct.life

    उनके अपने शब्दों में

    उनका संस्थापक-वक्तव्य पढ़ें ↑
  • सुनील सिंह

    सह-संस्थापक एवं प्रबंध ट्रस्टी

    अनुभवी प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ता, एफएमसीजी, ऊर्जा और आईटी उद्योगों में तीन दशकों से अधिक का वैश्विक अनुभव

    founder@mmct.life
  • राजारमन शंकर

    वरिष्ठ सलाहकार

    तीन दशकों से अधिक का कॉर्पोरेट नेतृत्व

  • डॉ. गोगी रमण मूर्ति

    चिकित्सा सलाहकार

    वरिष्ठ परामर्शदाता, मेडिकल ऑन्कोलॉजी; चिकित्सा एवं ऑन्कोलॉजी में पंद्रह वर्ष का अनुभव

  • अनास्तासिया ओबेरॉय

    सलाहकार

    विवरण प्रतीक्षित

    उनके अपने शब्दों में

    उनके अपने शब्द आने बाक़ी हैं

हमारी मुख्य सहयोगी टीम

  • अंगिरा शांघवी लोढ़ा

    विधि सलाहकार

  • डॉ. रश्मि नरवाल

    चिकित्सा सहयोग

    एमबीबीएस, जनरल मेडिसिन में एम.डी. (द्वितीय वर्ष)

  • अनिल वर्मा

    चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं अंकेक्षक

  • रश्मि वर्मा

    भंडारा सेवा साझेदार

    Need of an Hour एनजीओ की अध्यक्ष

  • प्रिया शर्मा

    डिजिटल एवं सोशल ब्रांड संचालन

  • साहिल भास्कर

    कार्यक्रम संचालन